अगरकर पर लगेगी मुहर, CAC के सामने अहम सवाल!

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के श्रीनिवास राव, मुंबई
हाल ही में नियुक्त की गई क्रिकेट अडवाइजरी कमिटी (सीएसी)- जिसमें मदन लाल, आरपी सिंह और सुलक्षणा नाईक शामिल हैं- के सामने जल्द ही एक बड़ी चुनौती आ सकती है। इस कमिटी को नैशनल सिलेक्शन कमिटी के दो सदस्यों को चुनाव करना है, जिनमें चैयरमैन भी शामिल है।

बीसीसीआई को मुख्य चयनकर्ता के पद के लिए कई आवेदन प्राप्त हुए हैं, लेकिन जैसाकि हमने पहले भी बताया था कि मुख्य चयनकर्ता के लिए पश्चिम या दक्षिण क्षेत्र का दावा सबसे मजबूत माना जा रहा है।

भारतीय टीम के पूर्व गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद, अजीत अगरकर और लक्ष्मण शिवरामाकृष्णनन के अलावा पूर्व विकेटकीपर नयन मोंगिया ने भी आवेदन किया है। इसके साथ ही सेंट्रल जोन से कई क्रिकेटर्स ने भी सीवी भेजे हैं।

इन सब नामों में अजीत अगरकर की दावेदारी सबसे मजबूत नजर आ रही है। हालांकि इस पद के लिए सीएसी सदस्यों और बीसीसीआई अध्यक्ष सौरभ गांगुली को काफी माथापच्ची करनी पड़ सकती है। अगरकर अगर सिलेक्शन कमिटी में आते हैं तो एक ही शहर (मुंबई) से आने वाले वह दूसरे सिलेक्टर होंगे लेकिन साथ ही इसके लिए सेंट्रल जोन के छह दावेदारों को नजरअंदाज करना होगा जिनका कमिटी में कोई प्रतिनिधित्व नहीं होगा।

पूर्व मुंबई क्रिकेटर का जहां अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा है वहीं शिवरामाकृष्णनन दक्षिण क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेंगे।

मामले को करीब से देख रहे एक सूत्र ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, ‘यह बात सही है कि अब जोनल पॉलिसी नही है लेकिन क्या हम यह कहना चाहते हैं कि हमें राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, विदर्भ और रेलवे को फॉलो करने वाले और काफी समय से उन्हें समझने वाले सिलेक्टर्स की जरूरत नहीं है।’

सीएसी को कुछ सवालों के जवाब तलाशने होंगे
1) क्या पश्चिम और दक्षिण जोन को भी इसी तरह नजरअंदाज किया जा सकता है। जबकि इन क्षेत्रों का हमेशा भारतीय क्रिकेट में दबदबा रहा है।
2) विदर्भ जैसी टीम, जिसने दो बार रणजी और ईरानी ट्रोफी जीती है, इस क्षेत्र को करीब से जानने वाले किसी का प्रतिनिधित्व नहीं होना चाहिए।
3) कल क्या ऐसी परिस्थिति भी हो सकती है, दो राष्ट्रीय चयनकर्ता सिर्फ उत्तर प्रदेश या छत्तीसगढ़ से हों? हम यहां एक परंपरा स्थापित कर रहे हैं।
4) क्या यह उसी शहर के दूसरे चयनकर्ता (जतिन परांजपे) के साथ न्याय होगा।
5) क्या बीसीसीआई साउथ जोन से किसी सिलेक्टर को न चुनक सिर्फ सेंट्रल जोन के बारे में ऐसा विचार कर सकती है।

दो आवेदकों ने बताया, ‘काफी समय से सेंट्रल जोन को काफी नजरअंदाज किया गया है। यह बात सही है कि सेंट्रल जोन में साउथ और वेस्ट जोन जैसे नाम नहीं हैं लेकिन यह एक बहुत बड़ा सर्किट है। हम कम से कम एक इंटरव्यू के लिए पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए।’

जहां तक अगरकर की बात है तो यह सच है कि वह काफी लंबे समय से खेल का हिस्सा हैं और इस सर्किट को अच्छी तरह समझते हैं। सूत्र ने कहा, ‘इस बात में कोई संदेह नहीं। उन्होंने काफी क्रिकेट देखा है और कई स्तर पर क्रिकेट खेला है। लेकिन आप यहां क्या देख रहे हैं? भारतीय क्रिकेट टीम में पांच खिलाड़ी मुंबई से हैं, दो चयनकर्ता, जिनमें मुख्य चयनकर्ता भी शामिल है, वे भी मुंबई से हों। बीसीसीआई परांजपे का कार्यकाल खत्म होने का इंतजार क्यों नहीं कर सकती? वह इसके बाद भी अगरकर को जिम्मेदारी सौंप सकती है। इसके लिए एक साल से भी कम का वक्त बचा है।’

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